जीवन में हर व्यक्ति का अपना महत्व है। चाहे वह कितना भी छोटा या साधारण क्यों न हो, उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आज की यह कहानी एक परीक्षा हॉल में घटी घटना की है जो हमें यह सिखाती है कि हमें कभी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए। एक स्वीपर की वजह से पूरी परीक्षा रुक गई। यह कहानी हमें बताती है कि समाज में हर व्यक्ति की अपनी जगह है और हर काम का अपना महत्व है। चाहे वह पढ़ाने वाला शिक्षक हो या सफाई करने वाला कर्मचारी, सब जरूरी हैं। तो आइए जानते हैं इस प्रेरक प्रसंग को।
परीक्षा का दिन और तैयारी
एक बार एक विद्यालय में परीक्षा चल रही थी। सभी बच्चे अपनी तरफ से पूरी तैयारी करके आए थे। परीक्षा हॉल में सब कुछ व्यवस्थित था। शिक्षक बच्चों को निर्देश दे रहे थे। बच्चे अपनी अपनी सीटों पर बैठे थे। कुछ घबराए हुए थे तो कुछ आत्मविश्वास से भरे थे। कक्षा का सबसे ज्यादा पढ़ने वाला बच्चा भी वहां था जो हर परीक्षा में अव्वल आता था। उसे अपनी तैयारी पर पूरा विश्वास था। परीक्षक ने प्रश्न पत्र बांटे। सभी बच्चे लिखने के लिए तैयार हो गए। हॉल में पूरी शांति थी। सभी को लग रहा था कि परीक्षा अच्छी तरह से होगी। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया।
स्वीपर की अनुपस्थिति और समस्या
अचानक हॉल के एक कोने से बदबू आने लगी। किसी ने देखा कि शौचालय से पानी बह रहा है और गंदगी फैल रही है। बच्चे परेशान हो गए। शिक्षकों ने स्वीपर को बुलाने के लिए कहा। लेकिन पता चला कि स्वीपर उस दिन नहीं आया था। वह बीमार था। अब समस्या यह थी कि इस गंदगी को कौन साफ करेगा। बदबू से बच्चे परीक्षा नहीं दे पा रहे थे। कुछ बच्चों को उल्टी जैसा महसूस होने लगा। शिक्षकों ने आपस में बात की। किसी ने सुझाव दिया कि किसी और स्वीपर को बुलाया जाए। लेकिन वह जल्दी नहीं आ सकता था। परीक्षा रुक गई। सभी बच्चे बेचैन थे क्योंकि उनका समय बर्बाद हो रहा था।
प्रधानाचार्य का आना और निर्णय
जब प्रधानाचार्य को इस बात की जानकारी मिली तो वे तुरंत परीक्षा हॉल में आए। उन्होंने स्थिति को देखा। बच्चे परेशान थे। कुछ शिक्षक नाक पर रूमाल रखकर खड़े थे। प्रधानाचार्य ने समझ लिया कि अगर जल्दी कुछ नहीं किया गया तो परीक्षा रद्द करनी पड़ेगी। उन्होंने चपरासी को किसी स्वीपर को जल्दी बुलाने के लिए कहा। लेकिन तब तक काफी समय बीत चुका था। बच्चों का समय बर्बाद हो रहा था। कुछ बच्चे रोने लगे क्योंकि उन्होंने इतनी मेहनत से तैयारी की थी। प्रधानाचार्य ने घोषणा की कि परीक्षा को अगले दिन के लिए स्थगित किया जाता है। यह सुनकर सभी बच्चे निराश हो गए। एक छोटे से कारण से पूरी परीक्षा रुक गई थी।
सीख और एहसास
प्रधानाचार्य ने सभी बच्चों को इकट्ठा किया। उन्होंने कहा बच्चों आज तुम्हें एक बहुत बड़ी सीख मिली है। तुम सोच रहे होगे कि स्वीपर तो बस सफाई करने वाला है। लेकिन आज तुमने देखा कि एक स्वीपर की गैरमौजूदगी में पूरी परीक्षा रुक गई। यह हमें सिखाता है कि समाज में हर व्यक्ति का महत्व है। चाहे वह कितना भी छोटा काम करता हो, उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर स्वीपर ने सुबह सफाई नहीं की होती तो आज यह समस्या नहीं आती। तुममें से कुछ बच्चे बड़े होकर डॉक्टर बनोगे, कुछ इंजीनियर, कुछ शिक्षक। लेकिन याद रखना कि वह व्यक्ति जो तुम्हारे ऑफिस या घर की सफाई करता है, वह भी उतना ही जरूरी है।
हर काम का सम्मान
प्रधानाचार्य ने आगे कहा आज के बाद तुम सभी को यह सीख लेनी चाहिए कि कभी किसी काम को छोटा मत समझो। और किसी इंसान को उसके काम की वजह से कम मत आंको। स्वीपर, चपरासी, माली, रसोइया, सभी का अपना महत्व है। अगर ये लोग अपना काम नहीं करेंगे तो तुम्हारी पढ़ाई प्रभावित होगी। इसलिए हर व्यक्ति का सम्मान करो। चाहे वह कोई भी काम करता हो। याद रखो कि सभी काम जरूरी हैं। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जो व्यक्ति ईमानदारी से अपना काम करता है वह सम्मान का हकदार है। आज से तुम सब स्वीपर अंकल को धन्यवाद देना जब भी वो सफाई करें। बच्चों ने सिर हिलाया और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने कभी स्वीपर की ओर ध्यान नहीं दिया था।
अगले दिन की बदली सोच
अगले दिन जब फिर से परीक्षा हुई तो स्वीपर अंकल समय पर आए। उन्होंने पहले ही सब कुछ साफ कर दिया था। परीक्षा सुचारू रूप से हुई। इस बार कुछ बच्चों ने स्वीपर अंकल से बात की और धन्यवाद कहा। स्वीपर अंकल को बहुत अच्छा लगा। उन्हें पहली बार किसी ने धन्यवाद कहा था। उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। बच्चों को एहसास हुआ कि एक छोटा सा धन्यवाद किसी को कितना खुश कर सकता है। उस दिन के बाद से स्कूल में बदलाव आया। बच्चे अब सभी कर्मचारियों का सम्मान करने लगे। चपरासी, स्वीपर, माली सभी को सम्मान मिलने लगा। यह एक छोटी सी घटना थी लेकिन इसने सभी को एक बड़ी सीख दी।
कहानी का संदेश
यह प्रेरक प्रसंग हमें सिखाता है कि हर व्यक्ति का अपना महत्व है। समाज में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। सभी काम एक दूसरे से जुड़े हैं। एक व्यक्ति के बिना पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है। हमें सभी का सम्मान करना चाहिए। चाहे वह कोई भी काम करता हो। ईमानदारी से काम करने वाला हर इंसान सम्मान का हकदार है। बच्चों को बचपन से यह सीख देनी चाहिए कि सभी इंसान बराबर हैं। किसी को उसके काम की वजह से नीचा नहीं समझना चाहिए। यह सीख जीवन भर काम आती है। जो व्यक्ति सबका सम्मान करता है, सब उसका सम्मान करते हैं।
Disclaimer: यह एक प्रेरक प्रसंग है जो शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य समाज में सभी व्यक्तियों के महत्व को समझाना है। यह कहानी सिखाती है कि हर काम और हर इंसान महत्वपूर्ण है। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेते।