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Motivational Tips In Hindi: चाहे भूखे मर जाना पर यह 8 लोगों से कभी उम्मीद मत करना

जीवन में उम्मीदें रखना स्वाभाविक है लेकिन गलत लोगों से उम्मीद रखना दुख का कारण बनता है। कई बार हम ऐसे लोगों से मदद की आशा रखते हैं जो हमारी कभी मदद नहीं करते। इससे हमें निराशा और दुख मिलता है। आज हम जानेंगे उन आठ लोगों के बारे में जिनसे कभी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। यह जीवन का कड़वा सच है लेकिन इसे समझना जरूरी है। जब हम सही लोगों से सही उम्मीद रखते हैं तो जीवन आसान हो जाता है। तो आइए जानते हैं इन आठ लोगों के बारे में जो हमें निराश कर सकते हैं।

प्रश्न 1: अपने औलाद से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: आज के समय में बच्चे अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो गए हैं कि माता पिता की परवाह नहीं करते। जब तक जरूरत होती है तब तक साथ रहते हैं। बाद में अपनी दुनिया में खो जाते हैं। बुढ़ापे में माता पिता अकेले रह जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि अपने बच्चों पर निर्भर न रहें। अपना बुढ़ापा खुद संवारें और आत्मनिर्भर बनें।

प्रश्न 2: अपने भाई से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: भाई बचपन में साथ खेलते हैं लेकिन बड़े होकर अपनी अपनी राह चल देते हैं। शादी के बाद तो और भी दूरी आ जाती है। संपत्ति के झगड़े भाइयों को दुश्मन बना देते हैं। जो भाई कभी साथ रहते थे वे एक दूसरे से बात तक नहीं करते। इसलिए भाई से ज्यादा उम्मीद रखना गलत है।

प्रश्न 3: अपने रिश्तेदारों से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: रिश्तेदार तभी तक साथ होते हैं जब तक फायदा हो। मुसीबत के समय सब गायब हो जाते हैं। खुशी में सब आते हैं लेकिन दुख में कोई नहीं होता। रिश्तेदार अक्सर दिखावे के लिए मिलते हैं। असली मुश्किल में वे मुंह फेर लेते हैं। इसलिए रिश्तेदारों पर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 4: अपने दोस्तों से उम्मीद क्यों सीमित रखनी चाहिए?

Answer: दोस्ती अच्छी चीज है लेकिन हर दोस्त सच्चा नहीं होता। कई दोस्त केवल अच्छे समय में साथ होते हैं। बुरे वक्त में वे दूर हो जाते हैं। पैसों के मामले में दोस्ती खत्म हो जाती है। सच्चे दोस्त कम होते हैं इसलिए सबसे उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

प्रश्न 5: अपने ससुराल वालों से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: ससुराल में दामाद या बहू की इज्जत तभी तक है जब तक पैसा और ताकत है। गरीबी आते ही सम्मान खत्म हो जाता है। ससुराल वाले अपनी बेटी या बेटे का तो ख्याल रखते हैं लेकिन दामाद या बहू को बाहरी ही मानते हैं। इसलिए ससुराल वालों से ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

प्रश्न 6: अपने पड़ोसियों से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: पड़ोसी पास रहते हैं लेकिन दिल से नहीं। छोटी छोटी बातों पर झगड़े हो जाते हैं। ईर्ष्या और जलन रहती है। अगर आपकी तरक्की हो रही है तो पड़ोसी खुश नहीं होते। मुसीबत में भी पड़ोसी मदद से ज्यादा तमाशा देखने आते हैं। इसलिए पड़ोसियों से दूरी बनाकर रहना ठीक है।

प्रश्न 7: अपने सहकर्मियों से उम्मीद क्यों सीमित रखनी चाहिए?

Answer: ऑफिस में सहकर्मी दोस्त दिखते हैं लेकिन असल में प्रतिस्पर्धी होते हैं। सब अपनी तरक्की चाहते हैं। प्रमोशन के समय सब एक दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं। ऑफिस की बातें बाहर जाती हैं और गलतफहमी पैदा होती है। इसलिए सहकर्मियों से सीमित रिश्ता रखना ठीक है।

प्रश्न 8: अमीर और ताकतवर लोगों से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?

Answer: अमीर और ताकतवर लोग गरीबों को कीड़े मकोड़े समझते हैं। जब तक काम है तब तक मीठा बोलते हैं। काम खत्म होते ही मुंह फेर लेते हैं। वे केवल अपने फायदे की सोचते हैं। गरीबों की मदद नहीं करते। इसलिए अमीरों से उम्मीद रखना बेकार है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें।

किस पर भरोसा करें

अब सवाल उठता है कि फिर किस पर भरोसा करें। सबसे पहले खुद पर भरोसा करें। अपनी मेहनत और काबिलियत पर विश्वास रखें। भगवान पर भरोसा रखें। माता पिता अगर जिंदा हैं तो उनकी सेवा करें। सच्चे दोस्त बहुत कम होते हैं अगर मिल जाएं तो उन्हें संभालकर रखें। लेकिन किसी पर पूरी तरह निर्भर मत रहें। आत्मनिर्भर बनें। यही जीवन का सच है।

जीवन की सीख

यह कड़वी सच्चाई है लेकिन इसे स्वीकार करना जरूरी है। दुनिया में हर कोई अपने फायदे के लिए जीता है। सच्चा प्यार और रिश्ते बहुत कम होते हैं। इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि हम खुद पर निर्भर रहें। अपनी मेहनत करें। किसी से उम्मीद करके दुखी होने से अच्छा है कि खुद कमाएं और खुश रहें। यही असली स्वतंत्रता है। जब हम किसी पर निर्भर नहीं होते तो कोई हमें दुख नहीं दे सकता।

Disclaimer: यह लेख जीवन के कड़वे अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी रिश्ते को बदनाम करना नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की शिक्षा देना है। हर रिश्ते में अच्छे लोग भी होते हैं। यह लेख केवल सावधान रहने की सलाह देता है। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेते।

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